Friday, 12 June 2020

भारत शासन अधिनियम , 1935

यह अधिनियम भारत में पूर्ण उत्तरदायी सरकार के गठन में एक मील का पत्थर साबित हुई । यह एक लंबा और विस्तृत दस्तावेज था , जिसमें 321 धाराएं और 10 अनुसूचियां थी ।

अधिनियम की विशेषताएं-
1 - इस अधिनियम द्वारा अखिल भारतीय संघ की स्थापना की गई , जिसमें राज्य और रियासतों को एक इकाई की तरह माना गया । अधिनियम ने केन्द्र और राज्यों के बीच तीन सूचियां - संघ सूची (59 विषय) , राज्य सूची (54 विषय) तथा समवर्ती सूची में (36 विषय) के आधार पर शक्तियां का बंटवारा किया। अवशिष्ट शक्तियां वायसराय को दी गई । परन्तु यह संंघीय व्यवस्था कभी अस्तित्व में नहीं आई क्योंकि देसी रियासतों ने इसमें शामिल होने के लिए इनकार कर दिया ।

Saturday, 6 June 2020

जन हित याचिका

जनहित याचिका की अवधारणा की उत्पत्ति एवं विकास अमेरिका में 1960 के दशक में हुई ।
भारत देश में जनहित याचिका ( Public interest litigation ) सर्वोच्च न्यायालय का जनता को न्याय दिलाने का सरल उपाय है । इसकी शुरुआत 1980 के दशक के बीच में हुई। इस अवधारणा के विकास तथा प्रर्वतन का श्रेय  न्यायमूर्ति वी.आर.कृष्ण तथा न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती को जाता है ।
पीआईएल को सामाजिक क्रिया याचिका , सामाजिक हित याचिका तथा वर्गीय क्रिया के नाम से भी जाना जाता है ।

पी.आई.एल. का अर्थ -
पी.आई.एल. मतलब जनहित याचिका जिसके अंतर्गत कोई जनभावना वाला व्यक्ति या समाज सुधारक तथा सामाजिक संगठन किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूहों को अधिकार (न्याय) दिलाने के लिए न्यायालय जा सकता है । अगर कोई व्यक्ति या समूह निर्धनता , आज्ञानता अथवा अपनी 
सामाजिक या आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपने अधिकार प्राप्त नहीं कर पा रहे है। इस दशा में एक व्यक्ति अपनी प्रर्याप्त रुचि के बल पर ही अन्य व्यक्तियों को अधिकार दिलाने या किसी आम शिकायत को दूर करने के लिए न्यायालय जा सकता है ।
पी.आई.एल. कानून के शासन के लिए जरूरी है कि हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और उनके हनन किए जाने  स्थिति में अपने अधिकारों के लिए लड़ें ।
दूसरे शब्दों में पी.आई.एल. के वास्तविक उद्देश्य है।
1 - कानून की रक्षा करना ,
2 - सामाजिक - आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों की न्याय तक प्रभावकारी पहुंच बनाना ,
3 - मौलिक अधिकारों को सार्थक रूप से प्राप्त करना ।

Tuesday, 2 June 2020

नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक ( कैग )

नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक संसदीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग होता है । महालेखा परीक्षक ‌लेखा संबंधित उच्चतम (उच्च ) पद होता है। भारतीय संविधान में अनुच्छेद 148 में एक स्वतंत्र नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक की बात कही गई है , जो कि भारत की संचित निधि में से व्यय ( खर्च) की जाने वाली सभी धन संबंधी शक्तियों का लेखा परीक्षक करता है ।
यह सभी देशवासियों की आर्थिक स्थिति का संरक्षक होता है तथा केन्द्र सरकार और राज्य सरकार दोनों की वित्तीय प्रणाली पर नियंत्रण रखता है ।
नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य -
1 - नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक का पद सर्वप्रथम इंग्लैंड में अस्तित्व में आया ।
2 - भारत में लेखा परीक्षक विभाग  की स्थापना वर्ष 1905 में हुई ।

बजट

बजट सरकार की आय एवं व्यय से सम्बंधित अर्थात वार्षिक वित्तीय विवरण होता है । जिसमें बीते वर्ष में किए गए व्यय, संग्रह किया गया राजस्व तथा अन्य वित्तीय मामलों की समीक्षा, आगामी वर्ष में होने वाले व्यय तथा आय , व्ययों को संतुलित करने के लिए करों में किए गए परिवर्तन , ने कर लगाना तथा करों में छूट से सम्बंधित मामलों का विवरण और प्रावधान शामिल होते है ।
बजट प्रशासन में प्रत्येक स्तर पर ज़रुरी होता है । यह वित्तीय संतुलन को बनाए रखता है तथा सीमित संसाधन होने के बावजूद लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक होता है । 
बजट किसी राष्ट्र की आर्थिक स्थिति का पूर्ण वर्णन करता है ।
एक अच्छे बजट में निम्नलिखित बातों का होना आवश्यक होता है -
१ - बजट सिर्फ एक वर्ष का होना चाहिए ।
२ - बजट हमेशा संतुलित होना चाहिए ।
३ - बजट स्पष्ट और नकद आधार पर तैयार होना चाहिए ।
४ - बजट में राजस्व व पूंजीगत भाग अलग-अलग होना चाहिए।

Monday, 1 June 2020

प्रशासनिक सुधार आयोग

केन्द्र सरकार ने मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में सन् 1966 में प्रशासनिक सुधार आयोग ( एआरसी ) का गठन किया । ( जिसका अनुसरण के हनुमंतैया द्वारा किया गया )
इस रिपोर्ट के अध्ययन के लिए एम. सी. शीतलवाड़ की अध्यक्षता में एक दल का गठन किया गया और इस दल ने अंतिम रिपोर्ट 1969 में केेेेंद्र सरकार को सौंपी । इस आयोग ने केन्द्र - राज्य संबंधों में सुधार करने के लिए 22 सिफारिशें प्रस्तुत की ।
कुछ मुख्य सिफारिशें -
 1 - संविधान के अनुच्छेद 263 के अनुसार एक अंतर-राज्यीय परिषद का गठन किया जाए ।
2 - राज्यपाल किसी भी दल का न हो तथा जिसका प्रशासन में लंबा और अच्छा अनुभव हो ।
3 - राज्यों को अधिक शक्तियां दी जाए ।
4 - राज्य को अधिक वित्तीय संसाधन दिए जाए ताकि उनकी केन्द्र पर निर्भरता कम हो जाए ।
5 - राज्यों के अनुरोध पर या महत्वपूर्ण स्थितियों में ही राज्य में केन्द्रीय सशस्त्र बल की तैनाती हो ।

मेकियावली

मेकियावली का जन्म इटली के नगर फ्लोरेंस में एक सामान्य परिवार में सन् 1469 में हुआ था। उसको कोई उच्च शिक्षा तो नहीं दी गई पर लैटिन भाषा का अ...