परिवार में सन् 1469 में हुआ था। उसको कोई उच्च शिक्षा तो नहीं दी गई पर लैटिन भाषा का अच्छा ज्ञान दिया गया। उसमें योग्यता , चालाकी , बुद्धि इतनी थी कि फ्लोरेंस गणराज्य में उसे गृह तथा विदेश कार्यालय में क्लर्क का पद प्राप्त हो गया। कुछ ही समय में वह चांसरी के द्वितीय सचिव के पद पर पहुंच गया। 1512 ई॰ तक वह इस पद पर रहा। इस कालावधि में वह विभिन्न यूरोपियन देशों में 23 बार दूत नियुक्त किया गया। 1502 ई॰ में उसे पोप एलेक्जैंडर षष्ठ के अवैध किन्तु सैनिक दृष्टि से योग्य बेटे , नैतिकता के नियमों की परवाह न करते हुए अत्याचारों के माध्यम से इटली का शासन करने वाले ड्यूक सीजर बोर्जिया के संपर्क में आने का अवसर मिला। मेकियावली सीजर बोर्जिया से इतना प्रभावित हुआ कि उसे अपना आदर्श महापुरुष मान लिया और अपनी महान् रचना प्रिंस के नायक रूप में चित्रित किया।
सन् 1527 में 58 वर्ष की आयु में संगठित इटली का सपना देखने वाले इस इटालियन की एक साधारण मृत्यु हो गई।
मेकियावली की रचनाएं - प्रिंस , डिस्कोर्सेज , History of Florence , Novelle Bafagor Arcifiavolo , Act of War प्रमुख रचनाएं हैं।